ईरानी नौसेना का "विलायत 97" नामक सैन्य अभ्यास आरंभ हुआ है। यह सैन्य अभ्यास ईरान के हुरमुज़ स्ट्रैट, मेक्रान के तटवर्ती क्षेत्रों, ओमान सागर और हिंद महासागर के उत्तर में शुक्रवार से आरंभ हुआ है।
अपनी रक्षा के लिए जो भी ज़रूरी होगा इस्लामी गणतंत्र ईरान उसे अंजाम देगा। "विलायत 97" सैन्य अभ्यास को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने कहा कि ईरान के लिए हमेशा ख़तरे रहे हैं इसलिए चुनौतियों एवं ख़तरों से मुकाबले के लिए तैयारी ज़रूरी है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के अमेरिकी अध्ययन केन्द्र ने अपनी एक रिपोर्ट में ईरान को ऐसे बड़े देश के रूप में याद किया है जो विभिन्न प्रकार की मिसाइलों और राकेटों से सम्पन्न है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने नौसेना के अधिकारियों और कमांडरों से अपनी हालिया भेंट में कहा है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान किसी से भी युद्ध आरंभ करने का इच्छुक नहीं है परंतु इतना मज़बूत होना चाहिये कि दुश्मन ईरान पर हमले से न केवल भयभीत हो बल्कि एकजुटता, शक्ति और ईरान की सशस्त्र सेना की सक्रिय उपस्थिति के कारण ईरानी राष्ट्र के मस्तिष्क से ख़तरे का विचार ही निकल जाये।
ईरान और क्षेत्र के देश एक दूसरे से सहकारिता करके क्षेत्र की सुरक्षा को सुनिश्चित बना सकते हैं।
अनुभवों ने दर्शा दिया है कि क्षेत्र में विदेशियों की उपस्थिति का लक्ष्य क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना और हथियार बेचना है और यह उपस्थिति कभी भी क्षेत्रीय सुरक्षा के हित में नहीं रही है और इस बात को सिद्ध करने के लिए यही काफी है कि क्षेत्र में आतंकवादी गुट सक्रिय हैं और क्षेत्र में संकट एवं विवाद जारी हैं।
बहरहाल ईरानी नौसेना के "विलायत 97" सैन्य अभ्यास का संदेश यह है कि एक दूसरे के साथ सहकारिता करके क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा को सुनिश्चित बनाया जा सकता है और साथ ही इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्रीय असुरक्ष व चुनौती को दूर करना है।